मेरे बचपन की बात है। एक बार हम सब बच्चे गीली मिट्टी के गोले बनाकर मेरे घर की दीवार पर फेंक कर चिपका रहे थे। उससे पूरी दीवार गंदी हो गयी थी, पर हम सबको बहुत मजा आ रहा था। इतने में मेरी दादाजी वहाँ आ गये। उन्होंने कड़क आवाज में हम सबको डाँटा तो सब बच्चे भाग गये और केवल मैं अकेला वहाँ रह गया। मुझे कभी अपने दादाजी से डर नहीं लगता था। वो मुझसे प्यार से बोले-"ये क्या हो रहा था?" तब हँसते हुए मैंने कहा-"हम लोग खेल रहे थे। सब मिट्टी के गोले बनाकर दीवार पर फेंक रहे तो मैं भी वैसा करने लगा। बड़ा मजा आ रहा था।" तब दादाजी समझाते हुए बोले-"सब लोग कुएँ में कूद जायेंगे तो तुम भी उनके पीछे कुँए में कूद जाओगे? ऐसा तो भेड़ें करती हैं। तुम भेड़ हो कि मनुष्य हो? भगवान ने अक्ल नहीं दी क्या तुम्हें? अब ये साफ कौन करेगा? बताओ।" दादा जी की बात सुनकर मैं लज्जित हो गया। दीवार को साफ करना मेरे बस की बात नहीं थी क्योंकि हमने वो गोले बहुत ऊपर तक फेंके थे। कोई बड़ा ही स्टूल पर खड़े होकर दीवार साफ कर सकता था। मुझसे कुछ कहते नहीं बना। तब दादाजी ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा-"जरूरी नहीं की जो सब कर रहे हों वो सही हो। अपनी बुद्धि का उपयोग किया करो। भगवान ने तुम्हें भी अक्ल दी है।" यह सुनकर मैं दीवार के पास गया और जहाँ तक मेरे हाथ पहुँच सकते थे, वहाँ तक के सारे मिट्टी के गोले मैंने जमीन पर गिरा दिये। यह देखकर दादाजी खुश हो गये। मेरे दादाजी को ब्रह्मलीन हुए वर्षों हो गये, पर उनकी दी हुई यह एक सलाह शिक्षा बनकर मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन गयी। मैंने कभी भी किसी बात की वास्तविकता जाने बिना उसे सच नहीं माना। उनका यह परामर्श मेरे जीवन के कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मेरा सहायक बना, विशेषकर जब मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था और सब मेरे विरुद्ध थे। इसके लिए मैं आज भी अपने दादाजी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
I am trying to depict real face of our society by means of fictional stories based on real life incidents. I am trying to show how social evils destroy society, different mindsets of people on such issues, and how humanity still exists in hearts of people despite such conditions. I also write articles on different subjects.
Tuesday, June 30, 2020
Thursday, June 4, 2020
Innocent Creature
निर्दोष जीव को मार कर, तुम खुश कैसे होते हो?
Monday, May 25, 2020
Ego
पार्क से निकलते हुए उन्हें उन लोगों के बातें करने और हँसने की आवाजें सुनाई दे रही थीं-"ये आज कल के लड़के खुद को कुछ ज्यादा ही स्मार्ट समझते हैं। बोर्ड दिखाई नहीं दिया। हम लोगों को बिल्कुल मूर्ख समझ रखा है इन लोगों ने। इतनी बड़ी बिल्डिंग भी दिखाई नहीं दी।" ये सब बातें विवेक, राहुल, नंदन और सुरेंद्र को बहुत बुरी लगीं पर सब चुपचाप विकास के घर की तरफ चले जा रहे थे। सब थके हुए थे और सबका मूड बहुत खराब हो चुका था इसलिये किसी ने विनय और विकास से कुछ नहीं कहा। विकास के चेहरे पर पछतावे और शर्म के भाव थे और विनय क्रोध से लाल हो रहा था। आज सबके सामने उसका झूठा अहं खंडित हो गया था।
Wednesday, December 25, 2019
After a certain time
Wednesday, December 4, 2019
Nature
गौर करो तो पेड़-पौधों में भी जान है।
प्रकृति के हर कण की अपनी पहचान है।
कुदरत का हर रंग रूप बड़ा निराला है।
सब जड़-चेतन इस प्रकृति की ही संतान हैं।
इस धरती पर सबका बराबर अधिकार है।
ईश्वर को अपनी हर रचना से प्यार है।
फिर क्यों हम जंगलों को मिटा रहे हैं।
तरक्की के लिए प्रदूषण फैला रहे हैं।
यदि ऐसे ही हम पर्यावरण मिटायेंगे।
अपने बच्चों को कैसी धरती देकर जायेंगे।
आओ मिलकर पर्यावरण बचाएं हम।
अपनी आदतें बदलें और वृक्ष लगाएं हम।
Friday, November 29, 2019
When there will be the morning when ?
वो सुबह कब आएगी।
जब स्त्री निर्भय होगी, निर्भया नहीं बन पायेगी।
जब स्त्री शक्ति विश्व में, सर्वोपरि बन जायेगी।
दहेज के लिए फिर, कोई बहू नहीं जलाई जायेगी।
स्त्री बिना किसी डर के, पूरे विश्व में घूम पायेगी।
पुरुष के साथ बराबरी से, समाज को उन्नत बनायेगी।
जब कोई किसी स्त्री को, भोग्य वस्तु नहीं समझेगा।
मातृ शक्ति स्वरूपा स्त्री, हर घर में पूजी जायेगी।
जब कामी व्याभिचारियों से, ये धरती खाली हो जायेगी।
पवित्र सभ्य समाज में, हर बेटी शान से मुस्कुरायेगी।
वो सुबह कब आयेगी???
Monday, November 18, 2019
Teach me
मुझे भी सिखा दो, प्यार का दिखावा करना।